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राजन

राजन

राजन का अपने शहर से दूर इंजीनियरिंग कालेज में एडमीशन हो गया था । वह बहुत खुश था कि अपनी मन मर्जी से रहूंगा । जो मन होगा खांऊगा जब मन होगा उठूंगा । अब दीदी से झगड़ा नहीं होगा । मम्मी की किच किच नहीं होगी कि कपड़े यहां रखो । नाश्ता करो खाना खाओ दूध पिओ । डैडी नहीं बड़बड़ायेंगे कि पढ़ो , बाथरूम बंद क्यों नहीं करते । वैसे तो राजन बहुत अच्छा बच्चा था पढ़ने में भी तेज था बस एक ही बुरी आदत थी वह ममी डैडी को पलट कर जबाब दे देता था ।
हास्टल छोड़ते समय मम्मी समझाती रहीं : कायदे से रहना समय से नाश्ता जरुर कर लेना । अपनी चीजें सम्भाल कर रखना ।
राजन झुंझला पड़ा : मम्मी , छोड़ो । अब मैं बच्चा नहीं हूं ।
डैडी : हां हां । अरे अब वह इंजीनियर होने वाला है ।

कालेज में पहला दिन तो अच्छा बीत गया पर मेस के खाने में छोले चावल थे जो उसे पसंद नहीं थे वह ठीक से खा नहीं पाया । हास्टल के कमरे में सन्नाटा था । रूममेट अभी आया नहीं था । मम्मी के दिये बिस्किट खाये फिर याद आया मम्मी होतीं तो टोकती जूते ठीक जगह रखो । कुछ नाश्ता बनातीं , वह उनके बनाये खाने नाशते में मीन मेख जरूर निकालता था ।
नहीं रहा गया तो मम्मी को फोन लगाया । मम्मी की आवाज सुनते ही रुंआसी आवाज में बोला : आप सबकी बहुत याद आरही है ।
मम्मी बोलीं : अरे तू तो लड़कियों का मजाक उड़ाता था और लड़कियों की तरह ही रो रहा है ।
उसे पता था मम्मी उससे ज्यादा याद कर रहीं होंगी ।
फिर मम्मी की आवाज सुनाई दी : ठीक है , अगली छुट्टी में घर आ जाना ।
राजन खुश हो गया । छुट्टी में घर आया राजन बिलकुल बदला हुआ अलग ही था ।

मासूम

सेना की टुकड़ी जैसे ही सड़क पर पहुंची उस पर पत्थरों की बौछार शुरु हो गई । सैनिकों ने किसी तरह उन्हें खदेड़ा और पकड़ने की कोशिश की । बाकी तो भाग गये पर एक बारह तेरह साल का किशोर पकड़ में आ गया । उसे मेजर साहब के पास लाया गया । मेजर साहब रहमदिल मशहूर थे । उन्होंने पूछा : तुम ऐसा क्यों करते हो? हम लोग तो तुम्हारी कितनी मदद करते हैं ।

लड़का बोला : मैं क्या करुं ? मेरे अबू का कत्ल चार साल पहले हो गया था क्योंकि उन्होंने आतंकवादियों की बात मानने से मना कर दिया था । अब हमें पत्थर फेंकने के पैसे मिलते हैं और न फेंकने पर धमकी ।आप तो शायद एक बार माफी दें भी दे वे नहीं माफ करते ।

मेजर साहब ने उसे जाने दिया और मुहल्ले वालों ने एक बार फिर मन ही मन उनका शुक्रिया कि उन्होंने फिर एक मासूम लड़के को भटकने से बचा लिया ।

घलुआ

जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है पुरानी बातें ज्यादा याद आती हैं आयें भी क्यों नहीं नया कुछ होना भी तो कम हो जाता है । ऐसे ही एक दिन मुझे अपने बचपन की याद आ गई । जब मैं बचपन में गांव में रहता था या थोड़ा बड़े होने पर बाहर पढ़ते हुए गर्मी की छुट्टियों में गांव जाता था तो दूध , मट्ठा या  सब्जी कुछ भी खरीदने पर वे लोग तौलने नापने के बाद थोड़ा ज्यादा डाल देते थे जिसे हमारे यहां घलुआ कहते थे । अब याद आता है चाहे घलुआ कहें या कुछ और पर थोड़ा कुछ और पाने की लालसा हमारे डी एन ए में है ।  सब्जी चाहे जितनी मंहगी खरीदें धनिया , मिर्ची के लिए  किच किच जरूर करेंगे ।   इसीलिए तो भारत में हर जगह सेल लगी रहती है और सेल में भीड़ भी लगी रहती है । बड़ी बड़ी कम्पनियां हमारी इसी कमजोरी का फायदा उठाने के लिए एक पर एक फ्री का आफर देकर हमें ललचाती रहती हैं । पैकेट्स पर 10% 20% एक्स्ट्रा लिखा खूब दिखता है । 

          उत्तर प्रदेश में नये सरकार के मंत्री सरकारी दफ्तरों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं जिसमें हर दफ्तर में देर  से आने वालों की संख्या बहुत है । इन लेट लतीफों की भी यही मानसिकता होती है कि दस पंद्रह मिनट देर से अपने आफिस पहुंचें और पंद्रह बीस मिनट पहले आफिस छोड़ दें पर यही लेट लतीफ  अपने घर में काम करने वालों या मजदूरों को चाहते हैं कि आधा घंटा पहले आवें और आधा घंटा देर से जायें जबकि काम करने वाला इसका उल्टा चाहता है ।
       सड़क पर या कालोनी में आप निकलेंगे तो देखेंगे कहीं रास्ता अचानक संकरा हो जाएगा । वही हमारी आदत एक फीट ही सही पर सड़क पर बढ़ जायें । मेरे गृह नगर के मुहल्ले में एक न्याय के मित्र रहते हैं  इसलिए उनके घर के पास रास्ता एक फीट संकरा हो गया है । यहां कालोनी में भले लोग हैं एक तो कानून के रखवाले हैं दूसरे न्याय के अधीश हैं । यहां रास्ते में तो कोई नहीं बढ़ा पर  स्वभावगत कमजोरी – बालकनी रास्ते पर हो तो किसी का क्या नुकसान । बिजली का कनेक्शन हो पर पोल सड़क के दूसरी तरफ होना चाहिए । दोनों के मकान दो तरफ हैं इसलिए पोल एक सीधी कतार में नहीं हो सकते । एक बार मेरे भाई साहब कहने लगे कि जब तक दुकानदार अपनी दुकान का थोड़ा सामान सड़क पर न रखे उसे लगता है बिक्री नहीं होगी । मुझे ध्यान आया कभी एक दूधवाली ने कहा था विना पानी मिलाये तो हम अपने बच्चों को भी दूध नहीं देते , इससे पाप लगता है ( अब पानी कौन मिलाता है? बड़ी बड़ी चीजें हैं मिलाने को ) तो यह दुकान थोड़ा सड़क पर बढ़ाकर रखना शायद ऐसे पाप से बचने का उपाय होगा ।
ट्रैफिक जाम या सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण यह भी है ।  सड़क की चौड़ाई जो कम हो गई ।सड़क पर चलने वालों पर भी यह थोड़े और वाली भावना हावी होती है । हर कोई अपनी लेन से थोड़ा दायें और यदि डिवाइडर न हो तो अपोजिट लेन में चलना चाहता है । रेड लाइट को स्किप करके 30 सेकंड बचाना क्या है? हमारे छोटे शहरों में तो ऐसे चौराहों पर अच्छा खासा सर्कस देखने को मिल जाएगा । अगला रेड लाइट पर गाड़ी स्लो करेगा लगा रोक रहा है पर अचानक स्पीड बढ़ा देगा या बायें टर्न लेकर अचानक ट्रैफिक के बीच दाहिने हो जायेगा ।
         कहते हैं महाजनो येन गता स पन्था । आज के महापुरुष तो नेता और उनकी सरकार है । हमारी सरकार भी इसी घलुआ की तर्ज पर हर टैक्स पर कोई न कोई सरचार्ज या सेस जरूर लगाती है । एजुकेशन हो या स्वच्छता । लगता है इन कामों की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है इसलिए एक्स्ट्रा काम के लिए रूटीन टैक्स से अलग •••••••।
हमारे नगर निगम हाउस टैक्स वाटर टैक्स तो लेते हैं पर कूड़ा तो उनकी जिम्मेदारी नहीं है तो बैंकों के रिकवरी एजेन्ट के तर्ज पर कूड़ा एजेन्ट बना दिये जो कूड़ा लें न लें महीने के पहले हफ्ते में कलेक्शन चार्ज लेने जरूर आ जायेंगे । हमारे रेलवे ने कम कमाल नहीं किया । किराया तो रूटीन है थोड़ा एक्सट्रा लेने के लिए बहुत तरीके हैं । किसी ट्रेन को सुपर फास्ट नाम दो सुपरफास्ट चार्ज लो । तत्काल , प्रीमियम तत्काल चार्ज , प्रीमियम वेटिंग रूम के चार्ज । अरे बाबा , ट्रेन टाइम से चलाओ तो मैं क्यों वेट करूं ? वह दिन दूर नहीं जब रेलवे वाले ट्रेन बोर्डिंग चार्जेस , राइट टाइम चार्जेज वसूलने लगेंगे।

     

सोशल मीडिया और महिलाएं

​सोशल मीडिया 

सोशल मीडिया पर जो वर्ग ज्यादा सक्रिय है वह युवा है यानी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा शुरू होने के बाद का – इसमें पुरुष भी हैं और महिलायें भी । लेकिन अपवाद भी है एक बहुत बड़ी संख्या चालीस के आसपास की महिलाओं की है । पहले जहां इस आयु वर्ग की महिलायें दादी नानी बन जाती थीं अब ऐसा नहीं है । इस आयु वर्ग की महिलाओं के बच्चे कालेज चले जाते हैं और या तो हास्टल चले जाते हैं या न भी जायें तो अपने रुटीन के कामों के लिए आत्मनिर्भर हो चुके होते हैं ।इस लिए मध्य वर्ग की पढ़ी लिखी,  कम्प्यूटर का क ख ग जानने वाली,  एकल परिवार की , बच्चों के पालन-पोषण की तात्कालिक जिम्मेदारियों से मुक्त इन महिलाओं को थोड़ा वक्त मिलता है कि अब अपने बारे में भी थोड़ा सोचें । ऐसे में सोशल मीडिया उन्हें घर बैठे एक स्पेस मुहैया करा देता है जहां वे अपने मन की बात खुल कर कह सकती हैं । यह उन्हें उस ऊब और खालीपन से निजात दिलाता है जिस पर अभी तक उनका ध्यान नहीं गया या ध्यान देने का भी समय नहीं मिल सका । एक बार शुरू हो जाने के बाद सोच और अहसास का दायरा बढ़ जाता है । वे एकांत में बैठे  बैठे ही अपने मन की बात बेधड़क कह सकती हैं जो शायद किसी के सामने नहीं कह सकतीं । 

चालीस की उम्र एक खूबसूरत उम्र है । इस उम्र में पीछे मुड़कर देखें तो काफी कुछ जमा हो चुका होता है अपने अनुभव कोष में और भविष्य में भी काफी कुछ दिखता है यानी काफी कुछ है कहने सुनने को ।

छोटी सी बात 

​छोटी बात 

पत्नी को चिकनगुनिया हो गया यानी बुखार के साथ असहनीय जोड़ दर्द । पति ने हर बार की तरह मनोबल बढ़ाया “ धीरज रखो ।साहस से काम लो ।रोजमर्रा का काम जारी रखो वर्ना शरीर शिथिल हो जाएगा ।“

पत्नी ने सलाह पर अमल किया । बुखार और घरेलू काम काज साथ साथ चलते रहे । अगले हफ्ते भी बुखार नहीं उतरा बल्कि पति को भी हो गया । 

पत्नी ने पति की ही सलाह दोहरा कर मनोबल बढ़ाया “ धीरज रखो। रोजमर्रा के काम चलने दो वर्ना शरीर शिथिल हो जाएगा ।“

पर पति को धीरज नहीं आया “ नहीं मुझसे बर्दाश्त नहीं होता । मुझे पानी पिला दो और जरा सिर दबा दो ।“

जुमलेबाजी 

​जुमलेबाजी

उत्तर प्रदेश के चुनाव का आखिरी दौर कल है ।प्रचार बंद हो चुका है ।विकास की बातें थोड़ी बहुत हुईं पर चाहे देश के सर्वोच्च निर्वाचित नेता हों या प्रदेश के,  देश की सबसे पुरानी पार्टी के दूसरे नंबर के नेता हों या प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं बहन जी नये नये शब्द और अर्थ गढ़ने में कोई पीछे नहीं रहे ।

पेश है कुछ बानगी 

बहन जी सम्पत्ति पार्टी / भारतीय जुमलेबाजी पार्टी 

नेगेटिव दलित मैन

कसाब  ( कांग्रेस सपा बसपा )

कसाब  ( कम्प्यूटर स्मार्टफोन वाले बच्चे )

किसी ने सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष को ही कसाब कह दिया ।

स्कैम  (सपा कांग्रेस मायावती ) मुक्त 

स्कैम ( सेव कन्ट्री फ्राम अमित ऐण्ड मोदी )

स्कैम ( सर्विस करेज एबिलिटी माडेस्टी )

भाषा विज्ञानी और समाज शास्त्री इसमें आगे शोध करेंगे । इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तेजक और अस्तरीय भाषणों पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को सख्त निर्देश दिए ।इस चुनाव में तो इसका कोई असर नहीं दिखलाई पड़ा ।ईश्वर हमारे नेताओं को सद्बुद्धि और चुनाव आयोग को शक्ति प्रदान करें ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न आने पाये ।